दास्ताने इश्क को इंसान पसंद करते हैं
हम तो वो आशिक है जो इंसान पसंद करते हैं
Monday, October 25, 2010
मुलाक़ात
उस हलके असर का अब ये असर है
जो कभी इंसान था अब वो शायर है
मुलाक़ात ही ज़रूरी नहीं इस ज़िन्दगी के राह पर
ख़त तो वो ज़रिया है की रास्ता याद रहे
जो कभी इंसान था अब वो शायर है
मुलाक़ात ही ज़रूरी नहीं इस ज़िन्दगी के राह पर
ख़त तो वो ज़रिया है की रास्ता याद रहे
बहुत धोके खाकर
बहुत धोके खाकर इंसान बदल जाता है
या तो बिगड़ जाता है फिर संभल जाता है
सँभालने वाला फूँक कर कदम रखता है
इसलिए हर शख्स को ऐ "गैर" गैर ही समझता है
ज़िन्दगी हर छण धोके से भरी है
कदम कदम में नहीं कदम में भी दूरी है
या तो बिगड़ जाता है फिर संभल जाता है
सँभालने वाला फूँक कर कदम रखता है
इसलिए हर शख्स को ऐ "गैर" गैर ही समझता है
ज़िन्दगी हर छण धोके से भरी है
कदम कदम में नहीं कदम में भी दूरी है
Monday, October 4, 2010
किसी से कब कहाँ किसी को किसी से प्यार हो जाए
किसी से कब कहाँ किसी को किसी से प्यार हो जाए तुम्हारी याद करते करते कहीं ये दिल हार ना जाए कभी सोचो हमें तुम भी तो शायद प्यार हो जाए तुम्हारे खुद मना करने से भी इकरार हो जाए अभी तो हर taraf हमको नज़र आते हैं तेरे साए कभी कुछ करो ऐसा की कल्पना साकार हो जाए बहुत तनहाइयाँ हैं हर तरफ कहीं हम खो ना जाएँ कभी तुम भी बढाओ हाँथ के सहारा हमको मिल जाए हमेशा सोचते तुम हो की चला जायेगा दूर ये 'ग़ैर' कभी हमसे भी तुम पूछो तुम्हारे दिल में रहते हैं |
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